

बिजनौर जिले की अग्रणी साहित्य संस्था सबरंग की मासिक काव्य गोष्ठी में सुप्रसिद्ध गीतकार इंद्रदेव भारती को सम्मानित किया गया।
स्थानीय जैन धर्मशाला में कृष्ण कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में सहारनपुर से पधारे अनिल शर्मा प्रीत विशेष अतिथि और मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार इंद्रदेव भारती रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ संजीव एकल ने सरस्वती वंदना से किया। दीप अंजुम के संचालन में काव्य की रसधार बह निकली। मनोरंजन शर्मा ने जहां व्यंग रचना पढ़ी तो डा. अशोक शर्मा ने कहा कि गीत जब उभरे अधर पर रागनी भरमा गई।’
गीतकार इंद्रदेव भारती के सम्मान समारोह में अधिकांष कवियों ने गीत सुनाये। प्रसिद्ध कवि डा. अजय जनमेजय ने भी एक मधुर गीत प्रस्तुत किया- मेरे घर अबके बारिश की यारी नहीं छनी, रूठी रही यार कमरे की फिर से बालकनी।’ युवा कवि नरेन्द्र शिखर ने ‘कुछ इशारा जरूर देता है, वक्त से पहले पेड़ झर जाना’ सुनाकर दाद बटोरी तो विकास अग्रवाल ने मां गंगा का वंदन करते हुए कहा- फिर से पुराने रास्तों पर तू बहे प्रमोद में, चलो आज फिर से चलें गंगा की गोद में।’
डा. अनिल शर्मा प्रीत ने जो कमी थी कमी की कमी रह गई, हर तमत्रा दबी की दबी रह गई सुनाकर वाहवाही लूटी, तो संजीव एकल ने ‘चले तो जायें पर जायें कहां वहां के सिवा, बचा भी क्या है परिंदो पे आसमां के सिवा’ सुनाकर दिल जीत लिया। दीप अंजुम ने कहा- जंगल काटे शहर बसाये यूं हमने खुशहाली की, घर के बित्ते कोने में फिर गमला भर हरियाली की’।
ओम प्रकाश परमार ने कहा- मनभावन सावन रूदन कहीं गायन, कृपा कहीं सावन क्रन्दन कहीं सावन। मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार इन्द्रदेव भारती को तीन चरणों में सुना गया, आंचलिक भाषा के उनके गीतों पर सभी झूम उठे दो पंक्ति देंखें ये माटी का तन है दिवरा, जले प्राण की बाती रे।
इसके अतिक्ति कर्मवीर सिंह के लोकगीत, डा. दिग्विजय चौधरी की मुक्त कविता, डा. अनिल चौधरी व आरिफ गांधी की गजलें, सुरेश चन्द्र शर्मा और कृष्ण कमार पाठक के दोहे, श्रीमती राशि अग्रवाल के गीत और हुक्का बिजनौरी के हंसगुल्लों ने भी काव्य संध्या को नई ऊचाई पर पहुंचाया। कार्यक्रम में वरिष्ठ गीतकार इन्द्रदेव भारती जी को शाल, पटका, माला, श्रीफल व प्रतीक चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया गया। अंत में सबरंग के संयोजक हुक्का बिजनौरी ने सभी का आभार व्यक्त किया।






